बेतिया(प.चं.) :: वेतन विसंगति को दूर करे शिक्षा विभाग : प्रोo रणजीत कुमार

शहाबुद्दीन अहमद, बेतिया(प.चं.), बिहार। बिहार शिक्षा मंच के संयोजक तथा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भावी युवा एवम जुझारू प्रत्याशी प्रो रणजीत कुमार ने बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव आर के महाजन को पत्र भेजकर मांग किया है कि प्रशिक्षित एवम सेवा के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षको के वेतन निर्धारण संबंधी भेदभाव मूलक पत्रांक 1900 दिनांक 04.10.2019 को वापस लेकर शिक्षक हित में वेतन निर्धारण हेतु संशोधित पत्र निर्गत करने का आग्रह किया है। प्रो कुमार ने लिखा है कि शिक्षा विभाग काउक्त आशय का पत्र अल्प वेतन भोगी नियोजित शिक्षकों के हितों के प्रतिकूल है।


उक्त आदेश के कंडिका -3 में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 01 01 2016 के उपरांत जिन प्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों की सेवा अवधि दो वर्ष पूरी हो गई,उनका पूर्व में देय ग्रेड पे में 2.57 से गुणा करते हुए वेतन का निर्धारण नहीं किया जाएगा बल्कि ऐसे नियोजित प्रशिक्षित शिक्षक को लेवल -1 में जिस इंडेक्स में मूल वेतन प्राप्त हो रहा था, उन्हें दो वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर लेवल-2,3एवम 4 के समस्थानिक इंडेक्स में अंकित मूल वेतन देय होगा। इसी प्रकार सरकार के उक्त आदेश के कंडिका -4 में उल्लेख किया गया है कि अप्रशिक्षित शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि दो वर्ष पूर्ण होने की तिथि एवम सेवाकालीन प्रशिक्षण की तिथि, जो बाद में हो,को ग्रेड पे स्वीकृत होने की तिथि को लेवल -1 में जिस इंडेक्स में मूल वेतन प्राप्त हो रहा था,उन्हें क्रमशः लेवल-2,3एवम 4 के समस्थानिक इंडेक्स में अंकित मूल वेतन देय होगा जो अधिकतम लेवल--2,3 एवम 4 के इंडेक्स -3 से अधिक नहीं होगा।


शिक्षा विभाग के उक्त निर्णय से वर्ष 2014 और उसके बाद नियुक्त हजारों प्राथमिक, माध्यमिक एवम उच्च माध्यमिक शिक्षकों को न्यूनतम दो वेतन वृद्धि का नुकसान होगा अर्थात प्रत्येक शिक्षक को तीन से चार हजार रुपए प्रति माह कम वेतन मिलेगा। इसी तरह अनुसूचित जाति, जनजाति एवम अत्यंत पिछड़ी जातियों के नियुक्त हजारों अप्रशिक्षित शिक्षक, जिन्होंने सेवाकालीन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्हें भी शिक्षा विभाग के उक्त आदेश से प्रति माह तीन से चार हजार रुपए कम वेतन निर्धारित होगा। इन वर्गों के शिक्षकों को तो दोहरा नुकसान झेलना पड़ेगा। वर्तमान समय में अप्रशिक्षित नियुक्त शिक्षकों जिन्होंने सेवाकाल में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी वरीयता का निर्धारण नियुक्ति की तिथि से न होकर प्रशिक्षण प्राप्ति की तिथि से किया जा रहा है। ऊपर से वेतन निर्धारण में भी भेदभाव किया जा रहा है।यह सरकार के सामाजिक न्याय के साथ विकास की अवधारणा के प्रतिकूल है। विदित हो कि बिहार में नियोजित शिक्षक बहुत ही प्रतिकूल परिस्थितियों एवम अल्प वेतन में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।


शिक्षा एवम शिक्षक हित में 01 01 2016 और उसके बाद जो शिक्षक जितना पा रहे थे, उसमें 2.57 से गुणा कर उनका वेतन निर्धारण करने संबंधी संशोधित आदेश निर्गत किया जाय। दूसरे अनुसूचित जाति, जनजाति एवम अत्यंत पिछड़ी जातियों के अप्रशिक्षित नियुक्त शिक्षकों की वरीयता का निर्धारण प्रशिक्षण की तिथि से न कर नियुक्ति की तिथि से किया जाय। उम्मीद है सरकार नियोजित शिक्षकों के साथ न्याय करेगी।


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