छपरा :: गर्भधारण के तीन महीने बाद जांच होने से बच्चे को किया जा सकता है संक्रमण मुक्त : अपर परियोजना निदेशक

विजय कुमार शर्मा, बिहार, छपरा। गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच शत - प्रतिशत सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है और इसका अनुपालन कराने की जिम्मेवारी सिविल सर्जन समेत सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को दी गयी है। उक्त बातें बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के अपर परियोजना निदेशक डॉ अभय प्रसाद ने सिविल सर्जन कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बुधवार को कही।


इसके पहले उन्होंने सिविल सर्जन समेत सभी चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ बैठक की और जिले में चल रहे एचआईवी जांच के कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में करीब 61 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच हो रहा है, जिसे हर हाल में शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना है। इसके लिए उन्होंने जन सहभागिता को बढ़ावा देने पर बल दिया और कहा कि इसमें सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को तीन मुख्य जिम्मेदारी लेनी होंगी। पहला वह स्वयं की एचआईवी जांच कराएं। दूसरा अपने घर तथा आस-पास के प्रत्येक गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच एवं तीसरा अपने रिश्तेदारों व मित्रों की एचआईवी जांच करवाएं। इससे हम एचआईवी संक्रमण पर काबू पाने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि एचआईवी जानलेवा बीमारी है और सुरक्षा ही इसका बचाव है। साथ ही जांच में समय पर पता चल जाने से इसके संक्रमण को फैलने से न केवल रोका जा सकता है, बल्कि गर्भवती महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चों को भी संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तीन माह की गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच होने से यह संभव हो सकेगा। तीन माह की गर्भवती महिला अगर एचआईवी पॉजिटिव पाई जाती है तो, छह माह तक ए आर टी सेंटर में उसे दवा दी जायेगी, जिससे उसका बच्चा एचआईवी से संक्रमण मुक्त पैदा होगा। उन्होंने कहा कि इस पर नियंत्रण के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी जांच की व्यवस्था की गई है साथ हींं अब राज्य के सभी जेलों में आने वाले बंदियों की एचआईवी जांच कराई जा रही है। इस मौके पर सिविल सर्जन डा माधवेश्वर झा, पीपीटीसीटी राज्य समन्वयक आशीष कुमार, डीपीएम अरविंद कुमार, केंद्र के परामर्शी उर्मिला कुमारी, अभय कुमार दास, धनंजय कुमार एवं प्रवीण कुमार आदि मौजूद रहे।


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