बेतिया(पश्चिम चंपारण) :: ऐतिहासिक शिक्षक आंदोलन का अपमानजनक एवम दुःखद अंत : प्रो रणजीत

शहाबुद्दीन अहमद, कुशीनगर केसरी, बेतिया(पश्चिम चंपारण), बिहार। बिहार के 4 लाख नियोजित शिक्षकों का अपने न्यायोचित माँगो की पूर्ति हेतु दो माह से अधिक समय से जारी ऐतिहासिक हड़ताल के आकस्मिक, अपमानजनक एवम दुःखद अंत पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए बिहार शिक्षा मंच के संयोजक तथा स्नातकोत्तर शिक्षक संघ, जे पी यू,छपरा के सचिव प्रो रणजीत कुमार ने सरकार की शिक्षा एवम शिक्षक विरोधी नीति की कड़ी निंदा करते हुए शिक्षकों की चट्टानी एकता का क्रांतिकारी अभिनंदन किया है। प्रो कुमार ने घोर आश्चर्य व्यक्त किया है कि बिना किसी सम्मानजनक समझौते के आनन फानन में हड़ताल को वापस लेकर 4 लाख नियोजित शिक्षकों के सपनों एवम अरमानों का गला घोंट दिया गया।


उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान करीब छह दर्जन शहीद हुए शिक्षकों के परिवार के लिए घोर अपमानजनक स्थिति पैदा हो गई है। समझौते में शहीद शिक्षकों के पक्ष में संवेदना के एक शब्द भी अंकित नहीं किया गया है,यह हड़ताल वापसी उसी तरह से हुई जैसे सेना जंग के मैदान में मुश्तैदी एवम बहादुरी से डटी रही और सेनापति ने सुनियोजित तरीके से दुश्मन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। निश्चय ही इस प्रकार की हड़ताल वापसी ने भविष्य के शिक्षक आंदोलनों एवम संघर्षों को भी दांव पर लगा दिया है।कोरोना महामारी के नाम पर शिक्षकों की आर्थिक मांगों को स्थगित करने की दलील तो कुछ कुछ समझ में आती है लेकिन पुरानी सेवा शर्त, राज्य कर्मी का दर्जा, अंतरजिला स्थानांतरण, विद्यालयी शिक्षा को पंचायती राज से अलग करने जैसी ग़ैरवित्तीय मांगों को भी मानने के लिए सरकार पर दवाब नहीं बनाना नेतृत्व की विफलता तो है ही शिक्षकों के साथ भी धोखा है। इसका मतलब साफ है कि शिक्षकों के साथ गुलामों जैसा बर्ताव को अपनी श्रेष्ठता का मानदंड समझने वाली सरकार के लिए राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को कायम रखने में कोई रुचि नहीं है। प्रो कुमार ने सरकार द्वारा जारी पत्र में अस्पष्टता का हवाला देते हुए कहा है कि तोड़ फोड़ एवम हिंसा के फर्जी आरोपों के आधार पर निर्दोष शिक्षकों के खिलाफ दमन चक्र का सरकारी अभियान जारी रहने वाला है और इस मुद्दे पर नेतृत्व की चुप्पी खतरनाक है। नेतृत्व की नीति एवम नीयत पर तो पहले से ही शिक्षकों को शक एवम संदेह था,सरकार के शर्तों पर हड़ताल वापसी ने इस संदेह को विश्वास में बदल दिया है। शिक्षकों की रहनुमाई के नाम पर एक बार तो शिक्षक हितों की सौदेबाजी कर ली गई।शिक्षकों में घोर निराशा एवम हताशा व्याप्त है। प्रो कुमार ने शिक्षकों से धैर्य एवम संयम बनाये रखने की अपील करते हुए कहा है कि संघर्ष और बलिदान कभी बेकार नहीं जाता है।