छपरा :: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों व एएनएम को दी गयी प्रशिक्षण

·  एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन ·  बेहतर कार्यान्वयन को लेकर दी गयी जानकारी।


विजय कुमार शर्मा, बिहार, छपरा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत चलंत चिकित्सा दलों का एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविन्द कुमार ने की। प्रशिक्षण में सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा, परसा, अमनौर मढौरा प्रखंड के आरबीएसके के चिकित्सक, एएनएम, फार्मासिस्ट शामिल थे। मढौरा के डॉ. गुंजन कुमार के द्वारा ट्रेनिंग दी गयी। आरबीएसके-वेब पोर्टल पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग  के बारे में बताया गया। वेबपोर्टल पर रिपोर्टिंग करते समय किन बातों को ध्यान रखना है इसप विस्तार से चर्चा की गयी। इस मौके पर डीपीएम ने कहा कि बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग की औसत संख्या बढ़ायें। गुणवत्तापूर्ण स्क्रीनिंग करने, बच्चों को समय पर रेफर करने एवं आरबीएसके के तहत बच्चों को अधिकाधिक लाभान्वित करने का निर्देश दिया। बच्चों की बेहतर सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय है। अब स्वास्थ्य विभाग बुखार जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर बच्चों की जन्मजात विकृतियों एवं कई अन्य गंभीर जटिलताओं पर भी ध्यान दे रही है। इसको लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) चलाया जा रहा है। जिसमें जिला स्तर पर गठित आरबीएसके टीम द्वारा सरकारी स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों में स्वास्थ्य जटिलता की जांच की जा रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में अब तक लाखों बच्चों का इलाज किया गया है। साथ ही इन सभी बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध भी कराया गया है। इस मौके पर डीपीएम अरविन्द कुमार, डीएमएनई भानू शर्मा, आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह, मनोहर कुमार, प्रिंस राज, विनोद कुमार समेत अन्य मौजूद थे। आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान आरबीएसके चलंत चिकित्सा दलों को नियमित भ्रमण पर अधिक जोर देने की बात कही। यह बताया गया कि स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा कर अधिक से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जांच करें। जांच में किसी भी तरह की जटिल समस्या का पता चले तब तुरंत उचित रेफ़रल का भी ध्यान रखें। इससे सही समय पर डिफेक्ट की पहचान कर बच्चों को उचित देखभाल प्रदान करने में सहूलियत होगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों के फोर डी पर फोकस किया जाता है, जिसमें डिफेक्ट एट बर्थ,  डिफिशिएंसी,  डिसीज,  डेवलपमेंट डिलेज इंक्लूडिंग डिसएबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। इसमें 38 बीमारियों को चिह्नित किया गया है। आरबीएसके में शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होती है, जबकि छह साल से अठारह साल तक के विद्यालय में पड़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है।


Popular posts
बेतिया(प.चं.) :: विश्व शांति दूतों का हुआ अंतराष्ट्रीय सम्मेलन
Image
कुशीनगर :: भारत सरकार और कोर्ट के आदेश एवं सोसल डिस्टेंस की सरेआम धज्जिया उड़ाकर स्थानीय प्रशासन को दी जा रही है चुनौती, अधिकारी बने धृतराष्ट्र
Image
कुशीनगर :: गोरखपुर -फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण हेतु दावे/आपत्तियां प्राप्त करने की निर्धारित अंतिम तिथि 26 दिसंबर 2019 को आगे बढाते हुए संशोधित कार्यक्रम किया गया निर्धारित
Image
कुशीनगर :: आयुक्त गोरखपुर मंडल ने कहा कि अयोध्या फैसले पर आपसी सौहार्द बनना नैतिक जिम्मेदारी
Image
पटना :: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे हाई और प्लस 2 स्कूलों के शिक्षक